Saturday, July 17, 2010

सुनो हिटलर

हम गाएंगे / अंधेरों में भी /

जंगलों में भी / बस्तियों में भी /

पहाड़ों पे भी / मैदानों में भी /


आँखों से / होठों से /

हाथों से / पाँवों से /

समूचे जिस्म से /


ओ हिटलर!


हमारे घाव / हमारी झुर्रियाँ /

हमारी बिवाइयाँ / हमारे बेवक़्त पके बाल /

हमारी मार खाई पीठ / घुटता गला/


सभी तो

आकाश गुनगुना रहे हैं।


तुम कब तक दाँत पीसते रहोगे?

सुनो हिटलर--!


हम गा रहे हैं।

- वेणूगोपाल
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी

1 comment:

Udan Tashtari said...

बहुत सही!